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तकनीकी कमियों से मुआवजे से वंचित
नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम सवाल : कोविड-19 मुआवजे के कम वितरण क्यों, राज्यों से कहा-आवेदन निरस्त करने का कारण बताएं

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 से मौत के मामलों में पीड़ित परिवारों को मुआवजा न दिए जाने और भुगतान में देरी पर राज्य सरकारों को फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने वास्तविक मौतों की तुलना में कम आवेदनों को पारित करने के लिए आंध्र प्रदेश व बिहार के मुख्य सचिवों की खिंचाई की। शीर्ष अदालत ने साफ कहा, तकनीकी कमियों के कारण पीड़ितों को मुआवजे से वंचित नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा, मुआवजे का आवेदन निरस्त करने का कारण आवेदकों को बताया जाना चाहिए।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा, पोडित परिवारों को मुआवजा देने में देरी के खिलाफ बार-बार आदेश देने पर भी प्रशासन निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहा। सरकार सक्रिय यह देखते हुए कि कई राज्यों में मौत के लिए कदम नहीं उठा रही दायर दावों की संख्या आधिकारिक मौतों से कम है, शीर्ष कोर्ट ने कहा-सरकार सक्रिय कदम नहीं उठा रही। पीड़ितों तक पहुंचने के लिए राज्य व जिला विधि सेवा अधिकरण की मदद नहीं ले रहीं। पीठ ने कहा, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की मदद से उन बच्चों को मुआवजा दिलाने की कोशिश होनी चाहिए, जिन्होंने कोविड के कारण अपने माता-पिता या इनमें से किसी एक को खो दिया है।

सरकार नहीं उठा रही है सक्रिय कदम

भुगतान न करना आदेश की अवहेलना


पीठ ने कहा, पात्र दावेदारों को भुगतान नहीं करना हमारे आदेश की अवहेलना होगी। शीर्ष कोर्ट ने आंध्र प्रदेश व बिहार के मुख्य सचिवों को दोपहर दो बजे निजी तौर पर तलब किया था। आंध्र के मुख्य सचिव ने भरोसा दिलाया, कोशिश करेंगे कि एक भी दावेदार मुआवजे से वंचित न रहे। शीर्ष कोर्ट ने बिहार के लिए भी विशेष प्रयास करने की जरूरत बताई।

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Author: publicnewslive

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