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ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी मंदिर मामले में वाराणसी जिला कोर्ट का बड़ा फैसला आ गया है. जिला कोर्ट के जज अजय कृष्णा विश्वेश ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लायक माना है.

ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी मंदिर मामले में वाराणसी जिला कोर्ट का बड़ा फैसला आ गया है. जिला कोर्ट के जज अजय कृष्णा विश्वेश ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लायक माना है.

वाराणसी

ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी मंदिर मामले में वाराणसी जिला कोर्ट का बड़ा फैसला आ गया है. जिला कोर्ट के जज अजय कृष्णा विश्वेश ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लायक माना है.

पिछले साल अगस्त में 5 महिलाओं ने वाराणसी सिविल जज (सीनियर डिविजन) के सामने एक याचिका दायर की थी. इसमें उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद के बगल में बने श्रृंगार गौरी मंदिर में रोजाना पूजन-दर्शन की अनुमति देने की मांग की थी. महिलाओं की याचिका पर सिविल जज ने ज्ञानवापी परिसर का सर्वे भी करवाया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ये मामला सिविल जज की अदालत से जिला कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि मामला ‘जटिल’ और ‘संवेदनशील’ है, इसलिए इसकी सुनवाई 25-30 साल का अनुभव रखने वाले जज को करनी चाहिए. पिछले महीने जिला कोर्ट के जज अजय कृष्णा विश्वेश ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

इस मामले में फैसला कुछ भी हो, दोनों ही पक्ष ऊपरी अदालत जाने की बात कर रहे हैं. अगर फैसला हिंदू पक्ष में आता है तो फिर मस्जिद परिसर के ASI सर्वे और शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग करेंगे. ऐसे में मुस्लिम पक्ष इस मामले को ऊपरी अदालत में लेकर जाएगा. वहीं, फैसला मुस्लिम पक्ष में आया तो हिंदू पक्ष इसे ऊपरी अदालत में चुनौती देगा.

क्या है पूरा मामला?

  • 18 अगस्त 2021 को पांच महिलाओं ने सिविल जज (सीनियर डिविजन) के सामने एक वाद दायर किया था.
  • महिलाओं ने ज्ञानवापी मस्जिद के बगल में बने श्रृंगार गौरी मंदिर में रोजाना पूजन-दर्शन की मांग की. महिलाओं की मांग पर जज रवि कुमार दिवाकर ने मस्जिद परिसर का सर्वे कराने का आदेश दिया.
  • अदालत के आदेश पर इसी साल 14,15 और 16 मई को ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे किया गया. सर्वे के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने यहां शिवलिंग मिलने का दावा किया. हालांकि, मुस्लिम पक्ष का दावा था कि ये शिवलिंग नहीं, बल्कि फव्वारा है जो हर मस्जिद में होता है.
  • इसके बाद 20 मई को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सिविल जज से जिला अदालत के जज को ट्रांसफर कर दिया. कोर्ट ने कहा कि ये मामला काफी ‘जटिल’ और ‘संवेदनशील’ है, इसलिए बेहतर होगा कि इसकी सुनवाई 25-30 साल का अनुभव रखने वाले जज करें.
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Author: publicnewslive

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